Sunday, 14 February 2016


नफ़रत की वो आग लगाकर, हिंसा को अंजाम दिए
फिर सरहद की चंद लकीरें खींच के तुम बर्बाद किये
देश बँटा उनकी चालों पर, लाखों कत्ले-आम हुए
प्यार मोहब्बत करने वाले, फिर कैसे बदनाम हुए ?

वो भारत माँ की अस्मत, तिल-तिल हैं नीलाम किये
जाति - धरम में देश बाँटकर, सत्ता के परधान हुए
हमने तो अश्कों के बदले, हैं मुस्कानों के बाम दिए
प्यार मोहब्बत करने वाले, फिर कैसे बदनाम हुए ?

कह गए सयाने शायर भी, है प्यार की कोई जात नहीं
प्यार जहां के किसी धरम का, रहा कभी मोहताज नहीं
बरसाने जब प्रेम धरा पर, जनम लला घन श्याम लिए
प्यार मोहब्बत करने वाले, फिर कैसे बदनाम हुए  ?

धन दौलत से तौले तन को, बेटी तुम अपनी ब्याह दिए
फिर बेशर्मी से कैसे तुम, रब की जोड़ी ऐलान किये
इस दौलत की फ़ितरत ने ही, बेटी को दर्द तमाम दिए
प्यार मोहब्बत करने वाले, फिर कैसे बदनाम हुए ?

गर समझें हम प्यार में इनके, छिपा हुआ परवानापन
मिट जाएगा जड़ से एक दिन,  दहेज़ का मनमानापन
जाति-धरम पे अबतक जाने, कितने ही संग्राम हुए
प्यार मोहब्बत करने वाले, फिर कैसे बदनाम हुए ?


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