मोहब्बत को बाज़ारों
में, कभी
बिकते नहीं देखा
समन्दर के किनारों
को,
कभी हँसते
नहीं देखा
जिएं बिंदास हरपल हम, रहें खुश और दें खुशियाँ
गुज़रते वक़्त को हमने, कभी
थमते नहीं देखा
मोहब्बत में नुमाईश
की,
ज़रुरत ही नहीं
पड़ती
कहीं भी कोई गुंजाइश, कभी शक़ की
नहीं रहती
मोहब्बत की है तो बेहतर, इसे अंजाम
भी
देना
किया बदनाम तो रब की, कभी रहमत नहीं मिलती
तुम्हारी बंदिशे
तुमको, कभी
हँसने
नहीं
देंगी
तुम्हारे ख़्वाब
को
तुमसे,
कभी मिलने नहीं देंगी
ज़हाँ की बेरहम
रश्में,
कई दिल
तोड़
जायेंगी
मगर दो दिल मोहब्बत में, कभी
मिलने नहीं देंगी
शिक़ायत है मुझे उससे, जो दुनिया का रचयिता है
मोहब्बत ही तो की मैंने, मेरी इसमें ख़ता क्या है
तेरे दर-दर पे भटका हूँ, बहुत कर ली गुज़ारिश भी
सिवा ज़ख्मों के, बतला दे, मेरे दिल में बचा क्या है
तेरी आँखों
का पानी ये, बयां करता कहानी
है
हमें भी है खबर कि तू,
सादिल की दीवानी
है
हमें ताउम्र
ख़ुशहाली, नज़र आई मोहब्बत
में
दुआएं साथ तेरे हैं, रशम तुझको
निभानी
है
रश्में
भी ज़रूरी
हैं, मगर जो साथ चलती हों
बदलते
वक़्त के माफ़िक जो खुद को भी बदलती हों
रश्में
वो ज़हर सी हैं जो लोगों
को ज़ुदा कर दें
रहें रश्में
वो सदियों
तक, जो सबको एक करती हों
मोहब्बत
में जवां दो दिल, कभी
बालिग नहीं होते
मोहब्बत
में गिले शिक़वे, कभी वाज़िब
नहीं
होते
कभी
ग़म है तो खुशियाँ हैं, यही रंग-ढंग है जीने का
ये रिश्ते
प्यार
के सबको,
मुनासिब
भी नहीं होते
उसे रखा
है चिड़िया सा, हमेशा कैद
पिंज़रे में
खिले जो ख्वाब
दिल में
हैं, रहे सब डूब खतरे में
न जाने
क्यूं मोहब्बत
पे,
लगीं पाबंदियां इतनी
कि लड़के- लड़कियाँ अक्सर, हैं देते जान सदमे में
तेरे मज़हब की करतूतें, कभी
बढ़ने नहीं देंगी
मोहब्बत
की ये तालीमें, कभी
पढ़ने नहीं देंगी
तुझे चिड़िया
सा
रखेगीं, किसी सोने के पिंज़रे में
मगर
चिड़िया सा अम्बर में, कभी उड़ने नहीं देंगी
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