Sunday, 14 February 2016

करीब से, ज़िन्दगी और मौत को देखा है


ज़हां की हर तहज़ीब को, बड़े गौर से देखा है
बड़े करीब से, ज़िन्दगी और मौत को देखा है
देखा है हमने, बदलते हुए इंसानों को
इश्क़ में डूबे, तड़पते हुए इंसानों को
कभी-कभी मोहब्बत, ज़रुरत सी लगती है
कभी-कभी ज़रुरत, मोहब्बत सी लगती है
लोगों में नफ़रतों के, हर खौफ़ को देखा है
करीब से, ज़िन्दगी और मौत को देखा है 

हम भला करते हैं  किसी का, तो हम  भले हो जाते हैं
ज़रा  भी  गलती  हो  जाये,  तो  हम  बुरे  हो  जाते हैं
इसी सिलिसिले में कभी-कभी अपने पराये हो जाते हैं 
और  कभी - कभी पराये लोग भी  अपने  हो  जाते  हैं
इंसानों की इंसानों पर, हर रौब को देखा है
करीब  से,  ज़िन्दगी  और मौत को देखा है 

आधुनिक परिवेश और पुरानी मान्यताओं को देखा है
ज़िन्दगी के हर मोड़ पर तमाम विषमताओं को देखा है
इसी धरती की प्रतिभाओं को, सितारों पर देखा है
ज़िद और जुनून की, असीम क्षमताओं को देखा है
गुज़रते हुए  वक़्त  के, हर  दौर को देखा है 
करीब  से,  ज़िन्दगी  और मौत को देखा है


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