मुस्कुराती हुई
एक कली देखिये
मुड़के फिर अपनी ये, ज़िंदगी देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
गाँव से बनता
कोई, शहर
देखिये
और क़ुदरत का कोई, कहर देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
उजड़ा रंज़िश से कोई भी घर देखिये
फिर मोहब्बत का कोई
असर देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
जिंदगी का कोई
हमसफ़र देखिये
मुश्किलों में बड़ों
का हुनर देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
गंगा- यमुना की बहती लहर देखिये
कारखानों का घुलता ज़हर देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
गौर से आज, इतिहास
फिर देखिये
सरहदों पर शहादत के सिर देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
उगते सूरज की तुम, रौशनी देखिये
माँ की ममता भरी, ओढ़नी ओढ़ीये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
अपने घर गाँव की, हर गली देखिये
धूप और छाँव की, दिल्लगी देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
मुफलिसों के घरों का हसर देखिये
रिश्वतों की दरों का असर देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
बदले मौसम की हर एक वज़ह देखिये
उसको हर कोण से, हर तरह देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
युद्ध से क्या हुआ, खुद भला देखिये
आसुओं के सिवा क्या मिला देखिये
मुझको उम्मीद है, तुम
समझ जाओगे
बात अपने ही दिल की, जो सुन पाओगे
होती अनहोनियाँ अब सरे आम क्यूँ
खून की होलियाँ, हो रही आज क्यूँ
ज़िंदगी आज इतनी है, खामोश क्यूँ
खो रहे लोग हैं, आज भी होश क्यूँ
सारी बातों पे फिर
से, मनन
कीजिये
बात दिल की मगर, थोड़ी सुन लीजिये
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