हर एक ग़म छुपा करके
मुझे तो मुस्कुराना है
जलाकर खुद को सूरज सा
ज़हां में जगमगाना है
मेरे गुल तू, गुलिस्तां को
सदा गुलज़ार यूँ रखना
मेरे
पंछी, मोहब्बत के
दिलों में प्यार ही भरना
मुझे दरिया सा बढ़ते ही
बड़ी
ही दूर जाना
है
हर एक ग़म छुपा करके, मुझे तो मुस्कुराना है .......
कभी लहरों सा उठता हूँ
कभी झरनों सा गिरता हूँ
कहीं झीलों सा ठहरा तो
कभी पवनों सा बहता हूँ
किये वादे
जो खुद से हैं
वो मुझको ही निभाना है
हर एक ग़म छुपा करके, मुझे तो मुस्कुराना है .......
मुझे
खुद पे, मुझे रब पे
भरोसा था, भरोसा
है
अँधेरा
लाख है लेकिन
उजाला
भी ज़रा सा है
मुझे
जुगनूं सा चम चम कर
अँधेरे को
भगाना है
हर एक ग़म छुपा करके, मुझे तो मुस्कुराना है .......
कोई सपना
न नामुमकिन
मगर थोड़ा
सा है मुश्किल
मगर जब
हो जुनूं दिल
में
तो
इकदिन मिलती है मंज़िल
मुझे रस्ते
खुदी अपने
उसूलों पे
बनाना है
हर एक ग़म छुपा करके, मुझे तो मुस्कुराना है .......
कहीं
सुर की, छिड़े स-र-ग-म
कहीं खुशियाँ,
कहीं है गम
कहीं हँसता
हुआ, बचपन
कहीं रोता
हुआ, है मन
मुझे
आँखों के अश्कों को
मोती सा
बनाना है
हर एक ग़म छुपा करके, मुझे तो मुस्कुराना है .......
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